जीपीएम…..जिले के पेंड्रारोड तहसील अंतर्गत जमीन घोटाले के हर दिन नए नए मामले सामने आते जा रहे पहले तो जमीन का रकबा बढ़ा दिया जाता है

तहसील के अंदर घुस कर तहसील के रिकॉर्ड में छेड़ – छाड़ कर दिया जाता है और पूरी की पूरी जमीन फर्जी तरीके से बिक्री भी कर दिया जाता है यही नहीं साहब के द्वारा नामांतरण भी पूरे तरीके से जांच के बाद ही किया जाता था अब जांच कैसी होती थी ये तो साहब ही बेहतर बता पाएंगे…कई पटवारियों का ट्रांसफर हुआ हर साल गिरदावरी हुई फिर भी इतने बड़े मामलों से पर्दा नहीं उठा… है न हैरानी की बात शासकीय जमीनों को भी भू माफियाओं ने फर्जी दस्तावेज बनाकर बेच दिया जिसमें बड़े साहब का भी सराहनीय योगदान रहा उसके बाद खेल और बड़ा होने लगा भू माफियाओं ने मरे हुए लोगों के नाम की जमीन खोज खोज कर फर्जी व्यक्तियों को खड़ा कर फर्जी रजिस्ट्री भी करने लग गए तो कहीं बिना कब्जे के जमीन को बेच दिया जाता है कहीं आदिवासी के जमीन को सामान्य करके बेच दिया जाता है आप समझ सकते ह कि आम किसान अपने छोटे से काम के लिए सालों भटकता रहता है मगर भू माफियाओं का बड़ा से बड़ा काम महज कुछ ही दिनों में हो जाना भू माफियाओं का अधिकारियों के चैंबर में बेरोक टोक जाना अधिकारियों से व्हाट्सएप्प काल के माध्यम से रात रात को बात करना इन सबके मायने आखिर क्या ही निकाला जा सकता है आपको बता दें इन भू माफियाओं के हौसले यूँही इतने नहीं बढ़ गए इन सब फर्जीवाड़े के पीछे पटवारी से लेकर उप पंजीयक और तहसीलदार स्तर के अधिकारियों का भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संरक्षण होने से इनकार नहीं किया जा सकता जल्द ही कुछ जमीनों के दस्तावेजों के साथ भू माफियाओं और उनको संरक्षण देने वाले अधिकारियों के नामों के खुलासे भी होने की उम्मीद है
